ॐDIVYORATHE BHAGAVAD GITA

विषय से पढ़िए

20 विषय, 81 उप-विषय। जो आज मन में है, वहीं से शुरू कीजिए।

मन की शांति

चिंता, तनाव और मानसिक शांति के लिए
चिंता और बेचैनी · क्रोध पर काबू · भटकता मन · नींद और थकान · अकेलापन

सफलता

लक्ष्य, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के लिए
लक्ष्य और एकाग्रता · असफलता के बाद · आत्मविश्वास · निरंतरता

कर्म और कर्तव्य

अपने कर्म को सही भाव से करने के लिए
फल की चिंता · काम से भागना · अपना काम बनाम दूसरे का · काम में मन न लगना

संबंध और परिवार

प्रेम, सम्मान और सुखी परिवार के लिए
मोह और लगाव · क्षमा करना · अपेक्षा और निराशा · बिछड़ना और शोक

भक्ति और आस्था

ईश्वर से जुड़ाव और आध्यात्मिक जीवन के लिए
भक्ति कैसे शुरू करें · श्रद्धा डगमगाए तो · ईश्वर कहाँ है · समर्पण

निर्णय और मार्गदर्शन

कठिन निर्णय और सही दिशा के लिए
दुविधा में · सही और गलत · सलाह किससे लें · निर्णय के बाद पछतावा

कठिन समय में साहस

जीवन की चुनौतियों में मजबूत रहने के लिए
जब सब टूट जाए · डर के सामने · अपमान और हार · धैर्य

धन और समृद्धि

धन, समृद्धि और सही उपयोग के लिए
धन का सही उपयोग · लोभ · कमी और संतोष · दान

स्वास्थ्य और जीवनशैली

शरीर, मन और संतुलित जीवन के लिए
आहार · नींद और दिनचर्या · शरीर और आत्मा · तप और संयम

ज्ञान और बुद्धि

ज्ञान, विवेक और सही समझ के लिए
ज्ञान कैसे मिले · अहंकार · संशय · विवेक

नेतृत्व और सेवा

नेतृत्व, समाज सेवा और लोगों के लिए कार्य करने हेतु
उदाहरण बनना · बिना स्वार्थ सेवा · दूसरों का मार्गदर्शन · ज़िम्मेदारी

मोह और भय से मुक्ति

भय, आसक्ति और मोह से मुक्त होने के लिए
मोह क्या है · मृत्यु का भय · आसक्ति · भविष्य की चिंता

धर्म और नीति

सही आचरण और नैतिक जीवन के लिए
सत्य · अहिंसा · स्वधर्म · दैवी गुण

वैराग्य और आत्मविकास

आत्मचिंतन और उच्च जीवन के लिए
वैराग्य का अर्थ · अभ्यास · आत्मचिंतन · मुक्ति

विद्यार्थी और पढ़ाई

एकाग्रता, परीक्षा और अनुशासन के लिए
एकाग्रता और पढ़ाई · परीक्षा का डर · आलस्य और टालमटोल · गुरु और विनम्रता

इंद्रियाँ और इच्छाएँ

चाहतों, आदतों और संयम के लिए
इच्छा कहाँ से आती है · इंद्रियों पर संयम · बुरी आदतें · संतोष का सुख

समत्व और संतुलन

सुख-दुःख, मान-अपमान और लाभ-हानि में स्थिर रहने के लिए
सुख-दुःख में स्थिर · मान और अपमान · लाभ और हानि · सबमें एक दृष्टि

श्रीकृष्ण का स्वरूप

अवतार, विभूति और विराट रूप
अवतार क्यों · सबमें मैं · विभूतियाँ · विराट रूप

तीन गुण और स्वभाव

सत्त्व, रज और तम — अपने स्वभाव को समझना
सत्त्व, रज और तम · मेरा स्वभाव कैसा है · श्रद्धा के तीन रूप · गुणों से पार

आत्मा और पुनर्जन्म

आत्मा, अंत समय और आगे की यात्रा के लिए
आत्मा अमर है · पुराने वस्त्र, नया शरीर · अंत समय का स्मरण · अधूरी साधना का क्या

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