अर्जुन ने कहा — मुझ पर कृपा करने के लिए आपने आत्मा के विषय में जो परम गोपनीय वचन कहे, उनसे मेरा यह मोह दूर हो गया है।
कल्पना कीजिए — युद्ध शुरू होने से ठीक पहले का रथ। दोनों सेनाएँ चुप खड़ी हैं, और अर्जुन कृष्ण की ओर मुड़कर बोल रहा है।
यह वही अर्जुन है जिसने धनुष नीचे रख दिया था। अब उसकी आवाज़ में घबराहट नहीं, कृतज्ञता है।
वह मानता है कि ये बातें उसे यूँ ही नहीं मिलीं — कृपा से मिलीं।
आपकी बातों ने मेरा भ्रम उतार दिया है — पर एक प्यास बाकी है।
यहीं से यह अध्याय खुलता है — सुनने की तृप्ति और देखने की भूख के बीच।
मोह दूर हुआ
सच्चा ज्ञान पहले मोह हटाता है, और फिर उस सत्य को सीधे जानने की प्यास जगाता है।
श्लोक 2
अर्जुन
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया।
त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्॥ २ ॥
हे कमल की पंखुड़ी जैसे नेत्रों वाले कृष्ण, मैंने आपसे सब प्राणियों के जन्म और लय की बात विस्तार से सुनी है, और आपकी अविनाशी महिमा भी सुनी है।
अर्जुन पीछे मुड़कर देखता है कि अब तक क्या-क्या सुना।
कैसे सारे प्राणी कृष्ण से निकलते हैं और उन्हीं में लौट जाते हैं। कैसे सूर्य का तेज, समुद्र की गहराई, हिमालय की स्थिरता — सब उन्हीं की झलक है।
और वह कृष्ण को एक कोमल नाम से पुकारता है — कमलपत्राक्ष, कमल की पंखुड़ी जैसी आँखों वाले।
जिस मित्र की आँखों में वह रोज़ देखता था, उन्हीं आँखों के पीछे पूरा ब्रह्मांड है।
सुनी हुई महिमा अब उसके मन में आकार लेने लगी है।
कमल-नयन कृष्ण
जो सबसे पास है, वही अक्सर सबसे अनंत होता है — बस हम उसे पहचानने में देर करते हैं।
श्लोक 3
अर्जुन
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर।
द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम॥ ३ ॥
हे परमेश्वर, आप अपने विषय में जैसा कहते हैं, वह ठीक वैसा ही है — मुझे कोई संदेह नहीं। फिर भी, हे पुरुषोत्तम, मैं आपका वह ईश्वरीय रूप अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ।
ध्यान दीजिए, अर्जुन पहले विश्वास जताता है, फिर माँगता है।
वह यह नहीं कहता कि मुझे प्रमाण चाहिए। वह कहता है — आप जैसा कहते हैं, वैसा ही है।
पर मनुष्य का मन ऐसा ही है। किसी समुद्र के बारे में सौ बार सुन लें, फिर भी एक बार किनारे खड़े होकर लहरें देखने का मन करता है।
मैं मानता हूँ, पर अब देखना चाहता हूँ।
यह शंका की माँग नहीं, प्रेम की माँग है।
रूप देखने की इच्छा
विश्वास और देखने की इच्छा विरोधी नहीं — गहरा विश्वास ही सबसे साहसी प्रार्थना करता है।
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